कुरान - 16:60 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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لِلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ مَثَلُ ٱلسَّوۡءِۖ وَلِلَّهِ ٱلۡمَثَلُ ٱلۡأَعۡلَىٰۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ

Transliteration: (Lillazeena laa yu'minoona bil Aakhirati masalus saw'i wa lillaahil masalul a'laa; wa Huwal 'Azeezul Hakeem)

जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनका हाल बुरा है [121], और अल्लाह की शान सबसे बुलन्द है [122], और वही ग़ालिब हिकमत वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 60 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनका हाल बुरा है [121], और अल्लाह की शान सबसे बुलन्द है [122], और वही ग़ालिब हिकमत वाला है।"

[121] बे-ईमानों का बदतरीन हाल

मुनकिरीन का हाल दुनिया में भी ज़िल्लत-आमेज़ था (बच्चियों को ज़िंदा दफ़्न करना, शराबनोशी, चोरी, बुत-परस्ती) और आख़िरत में भी वे हमेशा के अज़ाब में बर्बाद रहेंगे।

[122] 'अल-मसलुल आला' (अल्लाह की शान सबसे बुलन्द)

यहाँ 'मसल' से मुराद तशबीह नहीं, बल्कि अज़मत व जलाल की इन्तिहा है — "उस जैसी कोई चीज़ नहीं।" अल्लाह तआला हर नुक़्स, ऐब और मिसाल से पाक है और उसकी अज़मत व किब्रियाई सबसे आला व अरफ़ा है।

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