Transliteration: (yatawaaraa minal qawmimin sooo'i maa bushshira bih; a-yumsikuhoo 'alaa hoonin am yadussuhoo fit turaab; alaa saaa'a maa yahkumoon)
"लोगों से छिपा फिरता है उस बशारत की बुराई के सबब [117]; क्या उसे ज़िल्लत के साथ रखेगा [118] या उसे मिट्टी में दबा देगा [119]? सुन लो! कितना बुरा हुक्म लगाते हैं [120]!"
अरब के जाहिल लोग बेटी की पैदाइश पर एक-दूसरे को ताने देते थे और इसे शर्म की बात समझते थे।
वह सोचता था कि क्या उसे ज़लील हालत में पालूँ और लोगों की शर्मिंदगी उठाऊँ?
क़बीला मुज़िर, तमीम और ख़ोज़ाआ के बहुत से मुशरिक अपनी मासूम बच्चियों को ज़िंदा ज़मीन में दफ़्न कर देते थे, जो ज़ुल्म की इन्तिहा थी।
जिस चीज़ को वे ख़ुद ज़िल्लत समझते थे, उसे अल्लाह की तरफ़ मन्सूब करते थे। इससे साबित हुआ कि अल्लाह तआला की तरफ़ किसी ऐब या नुक़्स (जैसे झूठ, कमज़ोरी या औलाद) की निस्बत करना कुफ़्र है।
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