Transliteration: (Wa law yu'aakhizul laahun naasa bizulminhim maa taraka 'alaihaa min daaabbatinw wa laakiny yu'akhkhiruhum ilaaa ajalim musamman fa izaa jaaa'a ajaluhum laa yastaakhiroona saa'atanw wa laa yastaqdimoon)
"और अगर अल्लाह लोगों को उनके ज़ुल्म पर पकड़ता [123], तो ज़मीन पर कोई रेंगने वाला जीव न छोड़ता [124], लेकिन वह उन्हें एक मुक़र्रर वक़्त तक ढील देता है [125]; फिर जब उनका वक़्त आ पहुँचेगा, तो न एक घड़ी पीछे हट सकेंगे और न आगे बढ़ सकेंगे [126]।"
अगर अल्लाह तआला इन्सानों के हर गुनाह पर फ़ौरन गिरफ़्त फ़रमाता, तो ज़मीन पर कोई जानदार बाक़ी न रहता; मगर उसकी रहमत का तक़ाज़ा है कि वह मुक़र्रर मुद्दत तक मोहलत देता है।
इन्सान के गुनाहों और नाफ़रमानियों की वजह से बारिश रुकती है और ज़मीन पर कहतसाली फैलती है जिससे बेज़बान जानवर भी तकलीफ़ में मुब्तला होते हैं।
हर इन्सान और क़ौम की मौत और अज़ाब का एक तयशुदा वक़्त लौह-ए-महफ़ूज़ में मुक़र्रर है।
जब मौत या हलाकत की मुक़र्ररा घड़ी आ जाती है, तो उसमें एक पल की भी ताख़ीर या तक़दीम मुमकिन नहीं होती।
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