कुरान - 16:63 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
تَٱللَّهِ لَقَدۡ أَرۡسَلۡنَآ إِلَىٰٓ أُمَمٖ مِّن قَبۡلِكَ فَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ أَعۡمَٰلَهُمۡ فَهُوَ وَلِيُّهُمُ ٱلۡيَوۡمَ وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ

Transliteration: (Tallaahi laqad arsalnaaa ilaaa umamim min qablika fazayyana lahumush Shaitaanu a'maalahum fahuwa waliyyuhumul yawma wa lahum 'azaabun aleem)

अल्लाह की क़सम [130]! बेशक हमने आपसे पहले की उम्मतों में भी रसूल भेजे, तो शैतान ने उनके बुरे कामों को उनकी निगाह में भला कर दिखाया [131]; तो आज वही उनका साथी है और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है [132]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 63 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"अल्लाह की क़सम [130]! बेशक हमने आपसे पहले की उम्मतों में भी रसूल भेजे, तो शैतान ने उनके बुरे कामों को उनकी निगाह में भला कर दिखाया [131]; तो आज वही उनका साथी है और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है [132]।"

[130] अज़मत-ए-कलाम और क़सम

अल्लाह तआला अपनी ज़ात-ए-अक़्दस की क़सम खाकर अपने महबूब ﷺ को तसल्ली देता है कि पिछली क़ौमों के मुनकिरीन ने भी अपने रसूलों को झुठलाया था।

[131] शैतान का फ़रेब और तज़ईन

शैतान हमेशा से इन्सानों को गुनाह, शिर्क और तकब्बुर को ख़ूबसूरत और अच्छा बनाकर दिखाता आया है जिससे वे गुमराह हो गए।

[132] दुनिया में साथी, आख़िरत में अज़ाब

आज दुनिया में शैतान उनका मददगार और साथी बना हुआ है, मगर आख़िरत में वह ख़ुद उनसे बेज़ारी ज़ाहिर करेगा और वे दर्दनाक अज़ाब भुगतेंगे।

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