Transliteration: (Tallaahi laqad arsalnaaa ilaaa umamim min qablika fazayyana lahumush Shaitaanu a'maalahum fahuwa waliyyuhumul yawma wa lahum 'azaabun aleem)
"अल्लाह की क़सम [130]! बेशक हमने आपसे पहले की उम्मतों में भी रसूल भेजे, तो शैतान ने उनके बुरे कामों को उनकी निगाह में भला कर दिखाया [131]; तो आज वही उनका साथी है और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है [132]।"
अल्लाह तआला अपनी ज़ात-ए-अक़्दस की क़सम खाकर अपने महबूब ﷺ को तसल्ली देता है कि पिछली क़ौमों के मुनकिरीन ने भी अपने रसूलों को झुठलाया था।
शैतान हमेशा से इन्सानों को गुनाह, शिर्क और तकब्बुर को ख़ूबसूरत और अच्छा बनाकर दिखाता आया है जिससे वे गुमराह हो गए।
आज दुनिया में शैतान उनका मददगार और साथी बना हुआ है, मगर आख़िरत में वह ख़ुद उनसे बेज़ारी ज़ाहिर करेगा और वे दर्दनाक अज़ाब भुगतेंगे।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat