Transliteration: (Wa lahoo maa fis samaawaati wal ardi wa lahud deenu waasibaa; afaghairal laahi tattaqoon)
"और उसी का है जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है [107], और उसी की फ़रमाँबरदारी हमेशा लाज़िम है [108]। तो क्या अल्लाह के सिवा किसी और से डरोगे?"
कायनात की हर चीज़ का हक़ीक़ी मालिक अल्लाह है। दुनिया में अगर किसी इन्सान को कोई मिल्कियत अता होती है तो वह महज़ अमानत और आरज़ी है। अलबत्ता जो बन्दा अल्लाह का महबूब बन जाता है, सारी कायनात को उसकी ख़िदमत में लगा दिया जाता है।
अल्लाह के दीन की इताअत हमेशा क़ायम रहेगी क्योंकि वह अज़ली और अबदी है। दुनियावी क़वानीन मौत के साथ ख़त्म हो जाते हैं, मगर आख़िरत में भी सिर्फ़ अल्लाह ही की फ़रमाँबरदारी मोअतबर होगी।
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