Transliteration: (yakhaafoona Rabbahum min fawqihim wa yaf'aloona maa yu'maroon (section 6) (make sajda))
"वे अपने रब से जो उनके ऊपर है डरते हैं और वही करते हैं जो उन्हें हुक्म होता है [104]।
फ़रिश्ते मुकम्मल तौर पर मासूम हैं और उनसे कभी गुनाह सरज़द नहीं होता। वे अपनी फ़ितरत के मुताबिक़ केवल अल्लाह के अहकाम बजा लाते हैं। इस्लाम में सिर्फ़ अम्बिया किराम और फ़रिश्ते ही मासूम हैं, और बाज़ औलिया-ए-किराम अल्लाह की ख़ास हिफ़ाज़त (महफ़ूज़) में होते हैं।
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