Transliteration: (Allazeena sabaroo wa 'alaa Rabbihim yatawak kaloon)
"वे जिन्होंने सब्र किया और अपने रब ही पर भरोसा रखते हैं [90]।"
सब्र अख़्लाक़ और रूहानियत का सबसे बुलन्द मक़ाम है। मुहाजिरीन-ए-किराम ने वतन की जुदाई और ज़ुल्म पर सब्र किया और हर हाल में केवल अपने रब पर भरोसा रखा। हुज़ूर अकरम ﷺ ने भी हिजरत के वक़्त मक्का को हसरत से देखकर फ़रमाया था: "अगर तेरी क़ौम मुझे न निकालती, तो मैं तुझे कभी न छोड़ता।"
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