कुरान - 16:42 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
ٱلَّذِينَ صَبَرُواْ وَعَلَىٰ رَبِّهِمۡ يَتَوَكَّلُونَ

Transliteration: (Allazeena sabaroo wa 'alaa Rabbihim yatawak kaloon)

वे जिन्होंने सब्र किया और अपने रब ही पर भरोसा रखते हैं [90]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 42 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"वे जिन्होंने सब्र किया और अपने रब ही पर भरोसा रखते हैं [90]।"

[90] मुहाजिरीन का अज़ीम सब्र व तवक्कुल

सब्र अख़्लाक़ और रूहानियत का सबसे बुलन्द मक़ाम है। मुहाजिरीन-ए-किराम ने वतन की जुदाई और ज़ुल्म पर सब्र किया और हर हाल में केवल अपने रब पर भरोसा रखा। हुज़ूर अकरम ﷺ ने भी हिजरत के वक़्त मक्का को हसरत से देखकर फ़रमाया था: "अगर तेरी क़ौम मुझे न निकालती, तो मैं तुझे कभी न छोड़ता।"

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