कुरान - 16:40 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
إِنَّمَا قَوۡلُنَا لِشَيۡءٍ إِذَآ أَرَدۡنَٰهُ أَن نَّقُولَ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ

Transliteration: (Innamaa qawlunaa lishay'in izaa aradnaahu an naqoola lahoo kun fa yakoon (section 5))

हमारा फ़रमाना किसी चीज़ के लिए जब हम उसका इरादा करते हैं यही होता है कि हम उससे कहें "हो जा", तो वह फ़ौरन हो जाती है [86]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 40 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"हमारा फ़रमाना किसी चीज़ के लिए जब हम उसका इरादा करते हैं यही होता है कि हम उससे कहें 'हो जा', तो वह फ़ौरन हो जाती है [86]।"

[86] 'कुन फ़-यकून' और क़ुदरत-ए-इलाही

अल्लाह तआला की मुकम्मल क़ुदरत का बयान है कि जब वह किसी चीज़ को वजूद बख़्शना चाहे तो सिर्फ़ हुक्म फ़रमाता है और वह फ़ौरन बन जाती है। आलम-ए-अरवाह और हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की तख़्लीक़ इसी 'कुन' की तजल्ली थी। दुनिया में चीज़ों का ब-तदरीज (आहिस्ता-आहिस्ता) पैदा होना उसकी हिकमत का इज़हार है, और फ़ौरन पैदा होना उसकी क़ुदरत का इज़हार है।

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