कुरान - 16:66 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
وَإِنَّ لَكُمۡ فِي ٱلۡأَنۡعَٰمِ لَعِبۡرَةٗۖ نُّسۡقِيكُم مِّمَّا فِي بُطُونِهِۦ مِنۢ بَيۡنِ فَرۡثٖ وَدَمٖ لَّبَنًا خَالِصٗا سَآئِغٗا لِّلشَّـٰرِبِينَ

Transliteration: (Wa inna lakum fil an'aami la'ibrah; nusqeekum mimmmaa fee butoonihee mim baini farsinw wa damil labanann khaalisan saaa'ighallish shaaribeen)

और बेशक तुम्हारे लिए चौपायों (मवेशियों) में समझने का मक़ाम है [137]। हम तुम्हें उनके पेट की चीज़ों में से पिलाते हैं [138], गोबर और ख़ून के बीच में से ख़ालिस दूध, जो पीने वालों के गले से आसानी से उतरता है [139]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 66 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और बेशक तुम्हारे लिए चौपायों में समझने का मक़ाम है [137]... गोबर और ख़ून के बीच में से ख़ालिस दूध, जो पीने वालों के गले से आसानी से उतरता है [139]।"

[137] मवेशियों की तख़्लीक़ में बसीरत

दुधारू जानवरों की बनावट और उनके दूध का निज़ाम अल्लाह की हिकमत और क़ुदरत की बेमिसाल दलील है।

[138] चारे से दूध की तख़्लीक़

सूखी घास और भूसे से पेट के अन्दर पाक व लज़ीज़ दूध तैयार करना अल्लाह की मुकम्मल क़ुदरत का करिश्मा है जो इन्सान के बस से बाहर है।

[139] ख़ालिस और बे-आमेज़िश नेमत

गोबर और ख़ून के दरमियान से ऐसा पाक व साफ़ दूध निकालना जिसमें न गोबर की बू हो और न ख़ून का रंग, अल्लाह की ख़ास शान है। जो ज़ात पेट के अन्दर गोबर और ख़ून से दूध को जुदा कर सकती है, वह क़यामत के दिन ज़मीन के ज़र्रों से इन्सानी जिस्म को दोबारा तरतीब देने पर भी क़ादिर है। सूफ़िया फ़रमाते हैं कि जैसे अल्लाह ख़ालिस दूध अता फ़रमाता है, वैसे ही बन्दे को चाहिए कि वह रियाकारी से पाक ख़ालिस इबादत पेश करे।

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