Transliteration: (Wallaahu faddala ba'dakum 'alaa ba'din fir rizq; famal lazeena fuddiloo biraaaddee rizqihim 'alaa maa malakat aimaanuhum fahum feehi sawaaa'; afabini'matil laahi yajhadoon)
"और अल्लाह ने रोज़ी में तुम में से एक को दूसरे पर बड़ाई दी [150]... तो क्या वे अल्लाह की नेमत का इनकार करते हैं [152]?"
अल्लाह तआला ने अपनी हिकमत से किसी को अमीर और किसी को ग़रीब बनाया ताकि दुनिया का कारबार और निज़ाम चल सके।
काफ़िर अपने ग़ुलामों और मातहतों को अपनी दौलत में बराबर का शरीक नहीं बनाते, तो फिर वे अल्लाह की मख़्लूक़ और उसके बन्दों को अल्लाह की खुदाई और इबादत में कैसे शरीक ठहराते हैं!
अल्लाह की दी हुई दौलत और नेमतों को दूसरों के नाम मन्सूब करना अल्लाह की नेमत की खुली नाशुक्री और इनकार है।
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