कुरान - 16:72 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

72
وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّنۡ أَنفُسِكُمۡ أَزۡوَٰجٗا وَجَعَلَ لَكُم مِّنۡ أَزۡوَٰجِكُم بَنِينَ وَحَفَدَةٗ وَرَزَقَكُم مِّنَ ٱلطَّيِّبَٰتِۚ أَفَبِٱلۡبَٰطِلِ يُؤۡمِنُونَ وَبِنِعۡمَتِ ٱللَّهِ هُمۡ يَكۡفُرُونَ

Transliteration: (Wallaahu ja'ala lakum min anfusikum azwaajanw wa ja'ala lakum min azwaajikum baneena wa hafadatanw wa razaqakum minat taiyibaat; afabil baatili yu'minoona wa bini'matil laahi hum yakkfuroon)

और अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जिन्स से औरतें (बीवियाँ) बनाईं [153], और तुम्हारी औरतों से तुम्हारे लिए बेटे [154] और पोते-नवासे पैदा किए, और तुम्हें पाकीज़ा चीज़ों से रोज़ी दी [155]। तो क्या वे बातिल (झूठ) पर ईमान लाते हैं और अल्लाह के एहसान का इनकार करते हैं [156]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 72 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 72 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जिन्स से औरतें बनाईं [153]... और तुम्हें पाकीज़ा चीज़ों से रोज़ी दी [155]। तो क्या वे बातिल पर ईमान लाते हैं और अल्लाह के एहसान का इनकार करते हैं [156]?"

[153] इन्सानी हम-जिन्स से निकाह की नेमत

अल्लाह ने इन्सानों के लिए इन्सानी जिन्स से ही जोड़े बनाए ताकि आपस में उल्फ़त, मोहब्बत और सुकून क़ायम हो सके।

[154] औलाद और पोते-नवासों की नेमत

नेक बीवी, बेटे और पोते-नवासे (हफ़दा) अल्लाह का बड़ा इनाम हैं जिससे इन्सानी नस्ल का तसल्सुल और बुढ़ापे का सहारा क़ायम रहता है।

[155] तय्यिबात (पाकीज़ा रिज़्क़)

हलाल और पाकीज़ा ग़िज़ाएँ बन्दों के जिस्म और रूह की तहारत का ज़रिया हैं।

[156] बातिल की पैरवी और नाशुक्री

इतनी अज़ीम नेमतों के बाद भी बुतों को पूजना और अल्लाह की नेमतों को झुठलाना घोर ज़ुल्म है।

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