Transliteration: (Darabal laahu masalan 'abdam mammlookal laa yaqdiru 'alaa shai'inw wa marrazaqnaahu mminnaa rizqan hasanan fahuwa yunfiqu minhu sirranw wa jahra; hal yasta-woon; alhamdu lillaah; bal aksaruhum laa ya'lamoon)
"अल्लाह ने एक मिसाल बयान फ़रमाई [159]... क्या वे दोनों बराबर हो सकते हैं [160]? सब तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है, बल्कि उनमें से अक्सर नहीं जानते [161]।"
यह मिसाल बुतों और अल्लाह तआला के फ़र्क़ को वाज़ेह करने के लिए दी गई है: एक बेबस ग़ुलाम जिसके पास कुछ इख़्तियार नहीं, और दूसरा आज़ाद सख़ी अमीर जो दिल खोलकर ख़ैरात करता है।
जब इन्सानों में ही एक बेबस ग़ुलाम और एक मुख़्तार अमीर बराबर नहीं हो सकते, तो बेबस बुत उस क़ादिर-ए-मुतलक़ अल्लाह के बराबर कैसे हो सकते हैं!
अक्सर मुशरिक़ीन इस वाज़ेह अक़्ली हक़ीक़त पर ग़ौर नहीं करते और तकब्बुर व ज़िद के सबब कुफ़्र पर अड़े रहते हैं।
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