कुरान - 16:75 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

75
۞ضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلًا عَبۡدٗا مَّمۡلُوكٗا لَّا يَقۡدِرُ عَلَىٰ شَيۡءٖ وَمَن رَّزَقۡنَٰهُ مِنَّا رِزۡقًا حَسَنٗا فَهُوَ يُنفِقُ مِنۡهُ سِرّٗا وَجَهۡرًاۖ هَلۡ يَسۡتَوُۥنَۚ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِۚ بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Darabal laahu masalan 'abdam mammlookal laa yaqdiru 'alaa shai'inw wa marrazaqnaahu mminnaa rizqan hasanan fahuwa yunfiqu minhu sirranw wa jahra; hal yasta-woon; alhamdu lillaah; bal aksaruhum laa ya'lamoon)

अल्लाह ने एक मिसाल बयान फ़रमाई [159]: एक ग़ुलाम है दूसरे की मिल्कियत, जो किसी चीज़ पर क़ाबू नहीं रखता, और एक वह जिसे हमने अपनी तरफ़ से अच्छी रोज़ी अता फ़रमाई, तो वह उसमें से छिपाकर और खुल्लम-खुल्ला ख़र्च करता है। क्या वे दोनों बराबर हो सकते हैं [160]? सब तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है, बल्कि उनमें से अक्सर नहीं जानते [161]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 75 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 75 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"अल्लाह ने एक मिसाल बयान फ़रमाई [159]... क्या वे दोनों बराबर हो सकते हैं [160]? सब तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है, बल्कि उनमें से अक्सर नहीं जानते [161]।"

[159] शिर्क के बुतलान की ज़बरदस्त मिसाल

यह मिसाल बुतों और अल्लाह तआला के फ़र्क़ को वाज़ेह करने के लिए दी गई है: एक बेबस ग़ुलाम जिसके पास कुछ इख़्तियार नहीं, और दूसरा आज़ाद सख़ी अमीर जो दिल खोलकर ख़ैरात करता है।

[160] बेबस और क़ादिर की बराबरी नामुमकिन

जब इन्सानों में ही एक बेबस ग़ुलाम और एक मुख़्तार अमीर बराबर नहीं हो सकते, तो बेबस बुत उस क़ादिर-ए-मुतलक़ अल्लाह के बराबर कैसे हो सकते हैं!

[161] अक्सरियत हक़ से बे-ख़बर

अक्सर मुशरिक़ीन इस वाज़ेह अक़्ली हक़ीक़त पर ग़ौर नहीं करते और तकब्बुर व ज़िद के सबब कुफ़्र पर अड़े रहते हैं।

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