कुरान - 16:76 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

76
وَضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلٗا رَّجُلَيۡنِ أَحَدُهُمَآ أَبۡكَمُ لَا يَقۡدِرُ عَلَىٰ شَيۡءٖ وَهُوَ كَلٌّ عَلَىٰ مَوۡلَىٰهُ أَيۡنَمَا يُوَجِّههُّ لَا يَأۡتِ بِخَيۡرٍ هَلۡ يَسۡتَوِي هُوَ وَمَن يَأۡمُرُ بِٱلۡعَدۡلِ وَهُوَ عَلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ

Transliteration: (Wa darabal laahu masalar rajulaini ahaduhumaaa abkamu laa yaqdiru 'alaa shai'inw wa huwa kallun 'alaa mawlaahu ainamaa yuwajjihhu laa yaati bikhairin hal yastawee huwa wa many-yaamuru bil'adli wa huwa 'alaa Siraatim Mustaqeem (section 10))

और अल्लाह ने एक और मिसाल बयान फ़रमाई: दो आदमी हैं, एक गूँगा जो कुछ नहीं कर सकता [162] और अपने मालिक पर बोझ है [163]; जहाँ कहीं उसे भेजे कोई भलाई लेकर नहीं आता। क्या वह और वह जो इन्साफ़ का हुक्म देता है [164] और सीधी राह पर है, दोनों बराबर हो जाएँगे? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 76 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 76 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और अल्लाह ने एक और मिसाल बयान फ़रमाई: दो आदमी हैं, एक गूँगा जो कुछ नहीं कर सकता [162] और अपने मालिक पर बोझ है [163]... क्या वह और वह जो इन्साफ़ का हुक्म देता है [164] और सीधी राह पर है, दोनों बराबर हो जाएँगे?"

[162] पैदाइशी गूँगा और बेबस

'अबकम' पैदाइशी गूँगे को कहते हैं जो न बोल सके न समझ सके; यह काफ़िर और बुत की मिसाल है जो हक़ से बिल्कुल बहरे और गूँगे हैं।

[163] बे-फ़ायदा बोझ

वह न अपना काम कर सकता है और न किसी दूसरे के काम आता है, सिर्फ़ दूसरों पर बोझ बनता है।

[164] मोमिन और नबी का आला मर्तबा

इसके मुक़ाबले में वह नेक बन्दा (मोमिन व नबी) है जो हक़ बोलता है, इन्साफ़ का हुक्म देता है और ख़ुद सिरात-ए-मुस्तक़ीम पर चलता है। दोनों कभी बराबर नहीं हो सकते।

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