कुरान - 16:78 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

78
وَٱللَّهُ أَخۡرَجَكُم مِّنۢ بُطُونِ أُمَّهَٰتِكُمۡ لَا تَعۡلَمُونَ شَيۡـٔٗا وَجَعَلَ لَكُمُ ٱلسَّمۡعَ وَٱلۡأَبۡصَٰرَ وَٱلۡأَفۡـِٔدَةَ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ

Transliteration: (Wallaahu akhrajakum mim butooni ummahaatikum laa ta'lamoona shai'anw wa ja'ala lakumus sam'a wal absaara wal af'idata la'allakum tashkuroon)

और अल्लाह ने तुम्हें तुम्हारी माँओं के पेट से निकाला इस हाल में कि तुम कुछ न जानते थे [169], और तुम्हें कान और आँखें और दिल दिए [170] ताकि तुम शुक्रगुज़ार बनो [171]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 78 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 78 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और अल्लाह ने तुम्हें तुम्हारी माँओं के पेट से निकाला इस हाल में कि तुम कुछ न जानते थे [169], और तुम्हें कान और आँखें और दिल दिए [170] ताकि तुम शुक्रगुज़ार बनो [171]।"

[169] पैदाइश के वक़्त बे-इल्मी (अम्बिया का मुस्तस्ना होना)

यह आम इन्सानों का हाल है कि वे पैदाइश के वक़्त बे-इल्म होते हैं। अम्बिया किराम इससे मुस्तस्ना हैं; हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने पैदाइश के फ़ौरन बाद झूले में इल्म व नुबुव्वत का कलाम फ़रमाया था।

[170] कान, आँख और दिल इल्म के ज़राए

अल्लाह ने कान (वही और हक़ सुनने के लिए), आँखें (क़ुदरत की निशानियाँ देखने के लिए) और दिल (समझने के लिए) अता फ़रमाए। कान का पहले ज़िक्र इसलिए हुआ क्योंकि वही का नुज़ूल समाअत के ज़रिए होता है।

[171] हर अँग का शुक्र

नेमतों का शुक्र यह है कि इन आज़ा को नेकी और अल्लाह की इताअत में इस्तेमाल किया जाए और गुनाहों से बचाया जाए।

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