कुरान - 16:77 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

77
وَلِلَّهِ غَيۡبُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ وَمَآ أَمۡرُ ٱلسَّاعَةِ إِلَّا كَلَمۡحِ ٱلۡبَصَرِ أَوۡ هُوَ أَقۡرَبُۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

Transliteration: (Wa lillaahi ghaibus samaawaati wal ard; wa maaa amrus Saa'ati illaa kalamhil basari aw huwa aqrab; innal laaha 'alaaa kulli shai'in Qadeer)

और अल्लाह ही के लिए हैं [165] आसमानों और ज़मीन के ग़ैब (छिपे भेद) [166]। और क़यामत का मामला तो बस ऐसा ही है जैसे आँख का झपकना बल्कि उससे भी जल्द [167]। बेशक अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है [168]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 77 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 77 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और अल्लाह ही के लिए हैं [165] आसमानों और ज़मीन के ग़ैब [166]। और क़यामत का मामला तो बस ऐसा ही है जैसे आँख का झपकना बल्कि उससे भी जल्द [167]। बेशक अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है [168]।"

[165] अल्लाह की हक़ीक़ी मिल्कियत

कायनात की हर चीज़ अल्लाह की मख़्लूक़ और उसी की मिल्कियत है; इन्सान सिर्फ़ उसके दिए हुए फ़ायदे उठाता है।

[166] ग़ैब की मिल्कियत और अता

ज़मीन व आसमान के ग़ैब का ज़ाती इल्म अल्लाह ही के लिए मख़्सूस है; और वह अपने महबूब रसूलों को अपने फ़ज़्ल से ग़ैब का इल्म अता फ़रमाता है।

[167] क़यामत की अचानक आमद

क़यामत का वाक़े होना अल्लाह के लिए पलक झपकने से भी ज़्यादा तेज़ और आसान है — सूर फूँकते ही सारी कायनात फ़ना हो जाएगी और दूसरे सूर पर फ़ौरन दोबारा ज़िंदा हो जाएगी। नेक मोमिनों के लिए पचास हज़ार साल का दिन एक वक़्त की नमाज़ जितना मुख़्तसर गुज़रेगा।

[168] क़ुदरत-ए-ताम्मा

अल्लाह तआला हर चीज़ पर मुकम्मल क़ुदरत रखता है; जैसे बारिश के बाद लाखों कीड़े-मकौड़े फ़ौरन पैदा फ़रमा देता है, वैसे ही सारी कायनात को दोबारा ज़िंदा करना उसके लिए ज़र्रा बराबर भी मुश्किल नहीं।

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