Transliteration: (Fa in tawallaw fa innamaa 'alaikal balaaghul mubeen)
"फिर अगर वे मुँह फेरें, तो आप पर तो सिर्फ़ साफ़-साफ़ पहुँचा देना ही है [182]।"
ऐ महबूब! अगर ये लोग फिर भी ईमान न लाएँ, तो आप रंजीदा न हों; आपके ज़िम्मे हक़ को खोलकर पहुँचा देना था, और वह फ़रीज़ा आपने पूरी तरह अदा फ़रमा दिया।
हुज़ूर अकरम ﷺ ने शरीअत का कोई हुक्म नहीं छुपाया बल्कि मुकम्मल तौर पर उम्मत तक पहुँचाया, और हुज़ूर ﷺ अपनी जात में उम्मत से पूरी तरह बे-नियाज़ हैं।
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