Transliteration: (Wa yawma nab'asu min kulli ummatin shaheedan summa laa yu'zanu lillazeena kafaroo wa laa hum yusta'taboon)
"और जिस दिन हम हर उम्मत में से एक गवाह उठाएँगे [186], फिर काफ़िरों को न इजाज़त मिले [187] और न उनसे तौबा माँगी जाए [188]।"
क़यामत के दिन हर उम्मत के पैग़म्बर अपनी उम्मत के मुनकिरों के ख़िलाफ़ गवाही देंगे कि उन्होंने हक़ पहुँचा दिया था मगर इन बदबख़्तों ने इनकार किया।
दोज़ख़ में जाने के बाद काफ़िरों को कोई उज़्र या दुनिया में वापस जाने की इजाज़त नहीं मिलेगी — "उसी में ज़लील पड़े रहो और मुझसे बात न करो।"
न अल्लाह उनसे राज़ी होगा और न उन्हें तौबा का मौक़ा दिया जाएगा।
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