कुरान - 16:84 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

84
وَيَوۡمَ نَبۡعَثُ مِن كُلِّ أُمَّةٖ شَهِيدٗا ثُمَّ لَا يُؤۡذَنُ لِلَّذِينَ كَفَرُواْ وَلَا هُمۡ يُسۡتَعۡتَبُونَ

Transliteration: (Wa yawma nab'asu min kulli ummatin shaheedan summa laa yu'zanu lillazeena kafaroo wa laa hum yusta'taboon)

और जिस दिन हम हर उम्मत में से एक गवाह उठाएँगे [186], फिर काफ़िरों को न इजाज़त मिले [187] और न उनसे तौबा माँगी जाए [188]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 84 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 84 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और जिस दिन हम हर उम्मत में से एक गवाह उठाएँगे [186], फिर काफ़िरों को न इजाज़त मिले [187] और न उनसे तौबा माँगी जाए [188]।"

[186] हर उम्मत पर उनके पैग़म्बर की गवाही

क़यामत के दिन हर उम्मत के पैग़म्बर अपनी उम्मत के मुनकिरों के ख़िलाफ़ गवाही देंगे कि उन्होंने हक़ पहुँचा दिया था मगर इन बदबख़्तों ने इनकार किया।

[187] उज़्र और माफ़ी की कोई इजाज़त नहीं

दोज़ख़ में जाने के बाद काफ़िरों को कोई उज़्र या दुनिया में वापस जाने की इजाज़त नहीं मिलेगी — "उसी में ज़लील पड़े रहो और मुझसे बात न करो।"

[188] रज़ा-ए-इलाही की कोई उम्मीद नहीं

न अल्लाह उनसे राज़ी होगा और न उन्हें तौबा का मौक़ा दिया जाएगा।

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