कुरान - 16:85 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

85
وَإِذَا رَءَا ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ ٱلۡعَذَابَ فَلَا يُخَفَّفُ عَنۡهُمۡ وَلَا هُمۡ يُنظَرُونَ

Transliteration: (Wa izaa ra al lazeena zalamul 'azaaba falaa yukhaf fafu 'anhum wa laa hum yunzaroon)

और जब ज़ालिम अज़ाब देख लेंगे, तो न उनके लिए उसमें कोई कमी की जाएगी और न उन्हें कोई मोहलत दी जाएगी [189]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 85 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 85 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और जब ज़ालिम अज़ाब देख लेंगे, तो न उनके लिए उसमें कोई कमी की जाएगी और न उन्हें कोई मोहलत दी जाएगी [189]।"

[189] काफ़िरों के लिए मुसलसल और बे-तख़्फ़ीफ़ अज़ाब

अज़ाब में कमी न होना और मोहलत न मिलना सिर्फ़ काफ़िरों के लिए मख़्सूस है। गुनहगार मोमिनीन अल्लाह की रहमत और रसूलुल्लाह ﷺ की शफ़ाअत से इस दायमी अज़ाब से महफ़ूज़ रहेंगे।

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