Transliteration: (Ya'rifoona ni'matal laahi summa yunkiroonahaa wa aksaruhumul kaafiroon (section 11))
"वे अल्लाह की नेमत को पहचानते हैं [184], फिर उसका इनकार करते हैं, और उनमें से अक्सर काफ़िर हैं [185]।"
नेमत से मुराद हुज़ूर अकरम ﷺ की ज़ात-ए-मुबारक है जिसे मुशरिक़ीन अपने बेटों की तरह पहचानते थे, मगर ज़िद और हसद के सबब इनकार करते रहे (ख़ज़ाइनुल इरफ़ान)। या इससे मुराद अल्लाह की वे तमाम नेमतें हैं जिनका ऊपर ज़िक्र हुआ।
अल्लाह के इल्म में वे मुनकिर हैं और उनका ख़ातिमा भी कुफ़्र पर मुक़द्दर है।
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