कुरान - 16:83 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

83
يَعۡرِفُونَ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ ثُمَّ يُنكِرُونَهَا وَأَكۡثَرُهُمُ ٱلۡكَٰفِرُونَ

Transliteration: (Ya'rifoona ni'matal laahi summa yunkiroonahaa wa aksaruhumul kaafiroon (section 11))

वे अल्लाह की नेमत को पहचानते हैं [184], फिर उसका इनकार करते हैं, और उनमें से अक्सर काफ़िर हैं [185]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 83 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 83 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"वे अल्लाह की नेमत को पहचानते हैं [184], फिर उसका इनकार करते हैं, और उनमें से अक्सर काफ़िर हैं [185]।"

[184] पहचान कर इनकार करना

नेमत से मुराद हुज़ूर अकरम ﷺ की ज़ात-ए-मुबारक है जिसे मुशरिक़ीन अपने बेटों की तरह पहचानते थे, मगर ज़िद और हसद के सबब इनकार करते रहे (ख़ज़ाइनुल इरफ़ान)। या इससे मुराद अल्लाह की वे तमाम नेमतें हैं जिनका ऊपर ज़िक्र हुआ।

[185] कुफ़्र पर क़ाइम रहना

अल्लाह के इल्म में वे मुनकिर हैं और उनका ख़ातिमा भी कुफ़्र पर मुक़द्दर है।

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