कुरान - 16:81 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

81
وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّمَّا خَلَقَ ظِلَٰلٗا وَجَعَلَ لَكُم مِّنَ ٱلۡجِبَالِ أَكۡنَٰنٗا وَجَعَلَ لَكُمۡ سَرَٰبِيلَ تَقِيكُمُ ٱلۡحَرَّ وَسَرَٰبِيلَ تَقِيكُم بَأۡسَكُمۡۚ كَذَٰلِكَ يُتِمُّ نِعۡمَتَهُۥ عَلَيۡكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تُسۡلِمُونَ

Transliteration: (Wallaahu ja'ala lakum mimmaa khalaqa zilaalanw wa ja'ala lakum minal jibaali aknaananw wa ja'ala lakum saraabeela taqeekumul harra wa saraabeela taqeekum baasakum; kazaalika yutimmu ni'matahoo alaikum la'allakum tuslimoon)

और अल्लाह ने अपनी बनाई हुई चीज़ों से तुम्हारे लिए साए बनाए [176], और पहाड़ों में तुम्हारे लिए छिपने की जगहें (ग़ार व पनाहगाहें) बनाईं [177], और तुम्हारे लिए ऐसे कुर्ते बनाए जो तुम्हें गर्मी से बचाएँ [178] और ऐसे कुर्ते (ज़िरह/बख़्तरबंद) जो तुम्हारी लड़ाई में तुम्हें बचाएँ [179]। इसी तरह वह अपनी नेमतें तुम पर पूरी फ़रमाता है [180] ताकि तुम हुक्म मानो [181] (मुसलमान बनो)। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 81 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 81 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और अल्लाह ने अपनी बनाई हुई चीज़ों से तुम्हारे लिए साए बनाए [176]... इसी तरह वह अपनी नेमतें तुम पर पूरी फ़रमाता है [180] ताकि तुम हुक्म मानो [181]।"

[176] दरख़्तों और बादलों के साए

अल्लाह ने धूप की तपिश से बचाने के लिए दरख़्तों, पहाड़ों और बादलों में साए की नेमत रखी।

[177] पहाड़ों में ग़ारें और पनाहगाहें

पहाड़ों के अन्दर कुदरती ग़ारें और आश्रय बनाए जहाँ इन्सान आफ़तों और दुश्मनों से महफ़ूज़ रह सके।

[178] सूती व ऊनी लिबास

अरब में गर्मी ज़्यादा होती है, इसलिए ख़ास तौर पर गर्मी से बचाने वाले सूती कपड़ों का ज़िक्र हुआ जो सर्दी व गर्मी दोनों से बचाते हैं। इन्सान के जिस्म पर जानवरों की तरह बाल या पर नहीं हैं, इसलिए अल्लाह ने उसके लिए लिबास की हिकमत पैदा फ़रमाई।

[179] जंगी लिबास (ज़िरह व बख़्तरबंद)

लोहे और फौलाद की ज़िरह जो जंग में तीरों और तलवारों के ज़ख़्मों से हिफ़ाज़त करती है।

[180] इन्सान पर नेमतों की तकमील

अल्लाह तआला ने तमाम मख़्लूक़ात में सबसे ज़्यादा नेमतें इन्सान को अता फ़रमाईं।

[181] रूहानी हिफ़ाज़त की तरफ़ इशारा

जब अल्लाह ने इस फ़ानी जिस्म की हिफ़ाज़त के लिए इतने साज़ो-सामान बनाए, तो यक़ीनन उसने हमेशा रहने वाली रूह की हिफ़ाज़त के लिए भी रूहानी तबियत, ईमान का लिबास और रूहानी तबीब (अम्बिया व औलिया) मुक़र्रर फ़रमाए हैं।

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