कुरान - 16:86 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

86
وَإِذَا رَءَا ٱلَّذِينَ أَشۡرَكُواْ شُرَكَآءَهُمۡ قَالُواْ رَبَّنَا هَـٰٓؤُلَآءِ شُرَكَآؤُنَا ٱلَّذِينَ كُنَّا نَدۡعُواْ مِن دُونِكَۖ فَأَلۡقَوۡاْ إِلَيۡهِمُ ٱلۡقَوۡلَ إِنَّكُمۡ لَكَٰذِبُونَ

Transliteration: (Wa izaa ra al lazeena ashrakoo shurakaaa'ahum qaaloo Rabbana haaa'ulaaa'i shurakaaa'unal lazeena kunnaa nad'oo min doonika fa alqaw ilaihimul qawla innakum lakaaziboon)

और जब शिर्क करने वाले अपने ठहराए हुए शरीकों (बुतों) को देखेंगे [190], तो कहेंगे, "ऐ हमारे रब! ये हैं हमारे वे शरीक जिन्हें हम तेरे सिवा पूजते थे [191]।" तो वे (माबूद) उनकी तरफ़ बात फेंक मारेंगे कि "बेशक तुम बिल्कुल झूठे हो [192]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 86 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 86 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और जब शिर्क करने वाले अपने ठहराए हुए शरीकों को देखेंगे [190], तो कहेंगे, 'ऐ हमारे रब! ये हैं हमारे वे शरीक जिन्हें हम तेरे सिवा पूजते थे [191]।' तो वे उनकी तरफ़ बात फेंक मारेंगे कि 'बेशक तुम बिल्कुल झूठे हो [192]।'"

[190] बुत और गुमराह करने वाले सरदार

शरीकों से मुराद काफ़िरों के गुमराह करने वाले सरदार और वे बेजान बुत हैं जिन्हें वे पूजते थे। इसमें अम्बिया व औलिया शामिल नहीं हैं।

[191] हश्र में पहचान और इल्ज़ामतराशी

काफ़िर अपने गुनाहों को याद रखेंगे और अपने बुतों व सरदारों को पहचानकर उन पर इल्ज़ाम धरेंगे।

[192] माबूदों का साफ़ इनकार

वे बुत और देवता पलटकर कहेंगे: "न हमने तुम्हें अपनी पूजा का हुक्म दिया था और न हम अल्लाह के शरीक हैं; तुम हम पर झूठा बोहतान बाँधते हो!"

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