कुरान - 16:89 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

89
وَيَوۡمَ نَبۡعَثُ فِي كُلِّ أُمَّةٖ شَهِيدًا عَلَيۡهِم مِّنۡ أَنفُسِهِمۡۖ وَجِئۡنَا بِكَ شَهِيدًا عَلَىٰ هَـٰٓؤُلَآءِۚ وَنَزَّلۡنَا عَلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ تِبۡيَٰنٗا لِّكُلِّ شَيۡءٖ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٗ وَبُشۡرَىٰ لِلۡمُسۡلِمِينَ

Transliteration: (Wa yawma nab'asu fee kulli ummmatin shaheedan 'alaihim min anfusihim wa ji'naa bika shaheedan 'alaa haaa'ulaaa'; wa nazzalnaa 'alaikal Kitaaba tibyaanal likulli shai'inw wa hudanw wa rahmatanw wa bushraa lilmuslimeen (section 12))

और जिस दिन हम हर उम्मत में उन्हीं में से एक गवाह उठाएँगे कि उन पर गवाही दे [196], और ऐ महबूब! हम आपको उन सब पर गवाह बनाकर लाएँगे [197]। और हमने आप पर यह क़ुरआन उतारा जो हर चीज़ का साफ़-साफ़ बयान है [198], और हिदायत और रहमत और बशारत है मुसलमानों के लिए [199]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 89 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 89 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और जिस दिन हम हर उम्मत में उन्हीं में से एक गवाह उठाएँगे... और ऐ महबूब! हम आपको उन सब पर गवाह बनाकर लाएँगे [197]... जो हर चीज़ का साफ़-साफ़ बयान है [198], और हिदायत और रहमत और बशारत है मुसलमानों के लिए [199]।"

[196] उम्मतों पर उनके नबियों की गवाही

हर क़ौम के पैग़म्बर अपनी उम्मत के मुनकिरों के ख़िलाफ़ अदालत-ए-इलाही में गवाही देंगे।

[197] हुज़ूर अकरम ﷺ की गवाही तमाम कायनात पर

हुज़ूर अकरम ﷺ तमाम उम्मतों और तमाम पैग़म्बरों पर गवाह (शहीद) बनाकर पेश किए जाएँगे। गवाही वही दे सकता है जिसने अपनी आँखों से देखा हो; इससे साबित हुआ कि हुज़ूर ﷺ अपनी उम्मत के हर अमल और तमाम उम्मतों के अहवाल का मुशाहिदा फ़रमा रहे हैं। अदालत का फ़ैसला गवाह की गवाही पर होता है, चुनाँचे क़यामत की अदालत का फ़ैसला हुज़ूर ﷺ की गवाही पर होगा (शान-ए-हबीबुर्रहमान)।

[198] तिब्यानन लि-कुल्लि शै (हर चीज़ का रौशन बयान)

क़ुरआन-ए-पाक में कायनात की हर चीज़ का इल्म मौजूद है — "हमने इस किताब में कुछ नहीं छोड़ा।" जब हज़रत आयशा ने पूछा कि क्या किसी के नेक आमाल आसमान के तारों जितने हैं, तो हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया: "हाँ, उमर के आमाल तारों जितने हैं।" हुज़ूर ﷺ अपनी उम्मत के आमाल और आसमान के तमाम तारों की तादाद से पूरी तरह बाख़बर हैं; दोनों की बराबरी वही बता सकता है जिसे दोनों की मुकम्मल गिनती का इल्म हो।

[199] मुसलमानों के लिए ख़ास हिदायत व रहमत

क़ुरआन की ख़ास रहमत और बशारत सिर्फ़ मोमिनीन व मुसलमानों के लिए है जो इस पर ईमान लाते हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now