कुरान - 16:91 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

91
وَأَوۡفُواْ بِعَهۡدِ ٱللَّهِ إِذَا عَٰهَدتُّمۡ وَلَا تَنقُضُواْ ٱلۡأَيۡمَٰنَ بَعۡدَ تَوۡكِيدِهَا وَقَدۡ جَعَلۡتُمُ ٱللَّهَ عَلَيۡكُمۡ كَفِيلًاۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا تَفۡعَلُونَ

Transliteration: (Wa awfoo bi Ahdil laahi izaa 'aahattum wa laa tanqudul aimaana ba'da tawkeedihaa wa qad ja'altumul laaha 'alaikum kafeelaa; innal laaha ya'lamu maa taf'aloon)

और अल्लाह का अहद (क़ौल व क़रार) पूरा करो जब तुम कोई समझौता करो [203], और अपनी क़समों को उन्हें पक्का करने के बाद न तोड़ो [204] [205], जबकि तुमने अल्लाह को अपने ऊपर ज़ामिन बना रखा है। बेशक अल्लाह जानता है जो कुछ तुम करते हो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 91 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 91 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और अल्लाह का अहद पूरा करो जब तुम कोई समझौता करो [203], और अपनी क़समों को उन्हें पक्का करने के बाद न तोड़ो [204] [205]..."

[203] अल्लाह के नाम पर किए गए अहद की पाबंदी

चाहे वह अहद अल्लाह और उसके रसूल ﷺ से हो, या किसी इन्सान से अल्लाह का नाम लेकर किया गया हो — इसमें तमाम जायज़ मुआहिदे शामिल हैं; जैसे निकाह का अहद या पीर व मुर्शिद से बैअत का अहद। निकाह के वक़्त कलिमा पढ़वाया जाता है ताकि यह मुआहिदा मज़बूत हो।

[204] क़समें मज़बूत करके न तोड़ना

अल्लाह का नाम लेकर खाई गई क़सम को पक्का करने के बाद तोड़ना सख़्त गुनाह और हराम है।

[205] अल्लाह को ज़ामिन बनाना और कफ़्फ़ारा

अल्लाह को ज़ामिन बनाकर दूसरों का एतिमाद हासिल किया, इसलिए ऐसी क़सम को पूरा करना लाज़िम है। अगर जायज़ क़सम तोड़े तो कफ़्फ़ारा देना फ़र्ज़ है; अलबत्ता अगर किसी गुनाह की क़सम खा ली हो तो उस क़सम को तोड़ना और कफ़्फ़ारा अदा करना ज़रूरी है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now