कुरान - 16:90 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

90
۞إِنَّ ٱللَّهَ يَأۡمُرُ بِٱلۡعَدۡلِ وَٱلۡإِحۡسَٰنِ وَإِيتَآيِٕ ذِي ٱلۡقُرۡبَىٰ وَيَنۡهَىٰ عَنِ ٱلۡفَحۡشَآءِ وَٱلۡمُنكَرِ وَٱلۡبَغۡيِۚ يَعِظُكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَذَكَّرُونَ

Transliteration: (Innal laaha ya'muru bil 'adli wal ihsaani wa eetaaa'i zil qurbaa wa yanhaa 'anil fahshaaa'i wal munkari walbagh-i' ya'izukum la'allakum tazakkaroon)

बेशक अल्लाह हुक्म फ़रमाता है [200] इन्साफ़ और भलाई करने का और रिश्तेदारों को देने का [201], और मना फ़रमाता है बेहयाई, बुराई [202] और सरकशी से। वह तुम्हें नसीहत फ़रमाता है ताकि तुम ध्यान रखो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 90 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 90 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"बेशक अल्लाह हुक्म फ़रमाता है [200] इन्साफ़ और भलाई करने का और रिश्तेदारों को देने का [201], और मना फ़रमाता है बेहयाई, बुराई [202] और सरकशी से..."

[200] अद्ल व एहसान का हुक्म

हज़रत इब्ने अब्बास फ़रमाते हैं कि 'अद्ल' से मुराद तौहीद है और 'एहसान' से मुराद इख़्लास के साथ इबादत और मख़्लूक़ के साथ हुस्ने-सुलूक़ है।

[201] रिश्तेदारों के हुक़ूक़

रिश्तेदारों के हुक़ूक़ अजनबियों से ज़्यादा हैं। उन्हें माली व जिस्मानी मदद देना और दीन की हिदायत करना फ़र्ज़ है।

[202] तीन भलाइयाँ और तीन बुराइयाँ (ख़ुत्बा-ए-जुमा की आयत)

इस मुबारक़ आयत में तीन चीज़ों का हुक्म (अद्ल, एहसान, सिलारहमी) और तीन चीज़ों से मुमानअत (फ़हशा यानी ज़िना व चोरी, मुनकर यानी कुफ़्र व शिर्क, और बग़्य यानी ज़ुल्म व तकब्बुर) फ़रमाई गई है। यह आयत तमाम भलाइयों और बुराइयों का जामेअ निचोड़ है; इसे सुनकर हज़रत उस्मान बिन मज़ऊन मुसलमान हुए और अबू जहल व वलीद बिन मुग़ीरा ने भी इसकी अज़मत का एतराफ़ किया। इसीलिए यह आयत हर जुमा के ख़ुत्बे के आख़िर में पढ़ी जाती है (ख़ज़ाइनुल इरफ़ान)।

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