कुरान - 16:92 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

92
وَلَا تَكُونُواْ كَٱلَّتِي نَقَضَتۡ غَزۡلَهَا مِنۢ بَعۡدِ قُوَّةٍ أَنكَٰثٗا تَتَّخِذُونَ أَيۡمَٰنَكُمۡ دَخَلَۢا بَيۡنَكُمۡ أَن تَكُونَ أُمَّةٌ هِيَ أَرۡبَىٰ مِنۡ أُمَّةٍۚ إِنَّمَا يَبۡلُوكُمُ ٱللَّهُ بِهِۦۚ وَلَيُبَيِّنَنَّ لَكُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ مَا كُنتُمۡ فِيهِ تَخۡتَلِفُونَ

Transliteration: (Wa laa takoonoo kallatee naqadat ghazlahaa mim ba'di quwwatin ankaasaa; tattakhizoona aimaanakum dakhalam bainakum an takoona ummatun hiya arbaa min ummah; innnamaa yablookumul laahu bih; wa la yubaiyinanna lakum yawmal Qiyaamati maa kuntum feehi takhtalifoon)

और उस औरत की तरह न हो जाओ जिसने अपना सूत मज़बूत कातने के बाद टुकड़े-टुकड़े करके तोड़ डाला [206]। तुम अपनी क़समों को आपस में फ़रेब का ज़रिया बनाते हो कि एक गिरोह दूसरे गिरोह से ज़्यादा नफ़ा उठाए [207]। अल्लाह तो बस इसके ज़रिए तुम्हारी आज़माइश फ़रमाता है [208]; और वह क़यामत के दिन तुम्हारे सामने ज़रूर साफ़ कर देगा [209] जिस बात में तुम झगड़ते थे [210]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 92 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 92 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और उस औरत की तरह न हो जाओ जिसने अपना सूत मज़बूत कातने के बाद टुकड़े-टुकड़े करके तोड़ डाला [206]... [207]... [208]... [209]... [210]।"

[206] सूत कातकर तोड़ने वाली औरत (रैता) की मिसाल

मक्का मुअज़्ज़मा में 'रैता बिन्ते साअद' नाम की एक बे-वक़ूफ़ औरत थी जो दोपहर तक मेहनत से सूत कातती और फिर वहम व पागलपन में उसे टुकड़े-टुकड़े करके फाड़ डालती। अल्लाह ने मुआहिदा तोड़ने वालों को इस औरत जैसा बे-वक़ूफ़ क़रार दिया।

[207] दुनियावी लालच में मुआहिदे तोड़ना

अरब के लोगों का दस्तूर था कि कमज़ोर क़बीले से मुआहिदा करते, मगर जब कोई ज़्यादा ताक़तवर और मालदार क़बीला मिलता तो पहले का मुआहिदा तोड़कर दूसरे से मिल जाते। जैसे आज के सियासी लोग इलेक्शन में जनता से झूठे वादे करते हैं।

[208] आज़माइश-ए-इलाही

अल्लाह तआला तुम्हारे सामने ज़्यादा मालदार क़ौम लाकर आज़माता है कि तुम अपने वादे पर क़ायम रहते हो या लालच में फिसल जाते हो।

[209] क़यामत में आमाल का खुलना

क़यामत के दिन काफ़िरों के गुनाह ज़ाहिर किए जाएँगे, जबकि मोमिनों की नेकियाँ दिखाई जाएँगी और उनके गुनाहों की पर्देपोशी फ़रमाई जाएगी।

[210] अमली फ़ैसला

क़यामत के दिन अमली और हतमी फ़ैसला होगा; ज़बानी फ़ैसला तो दुनिया में क़ुरआन के ज़रिए कर दिया गया है।

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