Transliteration: (Wa laa tattakhizooo aimaanakum dakhalam bainakum fatazilla qadamum ba'da subootihaa wa tazooqus sooo'a bima sadattum 'an sabeelil laahi wa lakum 'azaabun 'azeem)
"और अपनी क़समों को आपस में फ़रेब का बहाना न बनाओ [214], कहीं कोई पाँव जमने के बाद फिसल न जाए [215]... [216]... [217]।"
क़सम खाकर धोखा देना या क़सम को गुनाह करने व नेकी छोड़ने का बहाना बनाना सख़्त मना है।
यानी इस्लाम की नेमत मिलने के बाद बद-अमली या वादे की ख़िलाफ़वर्जी के सबब ईमान से महरूम हो जाना। जो गुनाह की क़सम खाए, उसे तोड़ दे और कफ़्फ़ारा दे।
अल्लाह की राह से रोकने और धोखा देने के सबब दुनिया में ज़िल्लत और अज़ाब भुगतना पड़ेगा।
आख़िरत में अहद-शिकनी और कुफ़्र के सबब दर्दनाक जहन्नम की सज़ा होगी।
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