कुरान - 16:94 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

94
وَلَا تَتَّخِذُوٓاْ أَيۡمَٰنَكُمۡ دَخَلَۢا بَيۡنَكُمۡ فَتَزِلَّ قَدَمُۢ بَعۡدَ ثُبُوتِهَا وَتَذُوقُواْ ٱلسُّوٓءَ بِمَا صَدَدتُّمۡ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَلَكُمۡ عَذَابٌ عَظِيمٞ

Transliteration: (Wa laa tattakhizooo aimaanakum dakhalam bainakum fatazilla qadamum ba'da subootihaa wa tazooqus sooo'a bima sadattum 'an sabeelil laahi wa lakum 'azaabun 'azeem)

और अपनी क़समों को आपस में फ़रेब का बहाना न बनाओ [214], कहीं कोई पाँव जमने के बाद फिसल न जाए [215], और तुम्हें बुराई (अज़ाब) चखनी पड़े [216] इस सबब से कि तुमने अल्लाह की राह से रोका था। और तुम्हारे लिए बड़ा अज़ाब है [217]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 94 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 94 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और अपनी क़समों को आपस में फ़रेब का बहाना न बनाओ [214], कहीं कोई पाँव जमने के बाद फिसल न जाए [215]... [216]... [217]।"

[214] क़समों को फ़रेब का हीला न बनाना

क़सम खाकर धोखा देना या क़सम को गुनाह करने व नेकी छोड़ने का बहाना बनाना सख़्त मना है।

[215] पाँव फिसलना (गुमराही)

यानी इस्लाम की नेमत मिलने के बाद बद-अमली या वादे की ख़िलाफ़वर्जी के सबब ईमान से महरूम हो जाना। जो गुनाह की क़सम खाए, उसे तोड़ दे और कफ़्फ़ारा दे।

[216] दुनियावी अज़ाब

अल्लाह की राह से रोकने और धोखा देने के सबब दुनिया में ज़िल्लत और अज़ाब भुगतना पड़ेगा।

[217] आख़िरत का बड़ा अज़ाब

आख़िरत में अहद-शिकनी और कुफ़्र के सबब दर्दनाक जहन्नम की सज़ा होगी।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now