कुरान - 16:93 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

93
وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ لَجَعَلَكُمۡ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗ وَلَٰكِن يُضِلُّ مَن يَشَآءُ وَيَهۡدِي مَن يَشَآءُۚ وَلَتُسۡـَٔلُنَّ عَمَّا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Wa law shaaa'al laahu laja'alakum ummmatanw waahidatanw wa laakiny yudillu many-yashaaa'u wa yahdee many-yashaaa'; wa latus'alunna 'ammaa kuntum ta'maloon)

और अगर अल्लाह चाहता तो तुम सब को एक ही उम्मत बना देता [211], लेकिन वह जिसे चाहे भटकाए [212] और जिसे चाहे हिदायत फ़रमाए। और तुम से ज़रूर पूछ होगी उन कामों की जो तुम करते थे [213]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 93 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 93 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और अगर अल्लाह चाहता तो तुम सब को एक ही उम्मत बना देता [211], लेकिन वह जिसे चाहे भटकाए [212] और जिसे चाहे हिदायत फ़रमाए... [213]।"

[211] एक उम्मत न बनाने में हिकमत

अगर अल्लाह चाहता तो सबको ब-ज़ोर मुसलमान बना देता, मगर यह हिकमत-ए-इलाही के ख़िलाफ़ था। जैसे दुनिया में अमीर-ग़रीब, बीमार-तन्दुरुस्त हैं, वैसे ही आख़िरत में मोमिनों से जन्नत और मुनकिरों से दोज़ख़ आबाद होगी ताकि अल्लाह की रहमत और ग़ज़ब दोनों ज़ाहिर हों।

[212] हिदायत व गुमराही और इन्सानी इरादा

अल्लाह हिदायत की तौफ़ीक़ देता है या नाफ़रमान के दिल में बुराई का रुझान पैदा फ़रमा देता है जब वह ख़ुद कुफ़्र को चुनता है।

[213] बाज़पुर्स हिसाब के लिए

यह पूछ-ताछ हिसाब और अद्ल क़ायम करने के लिए होगी, क्योंकि अल्लाह हर चीज़ का इल्म पहले से रखता है।

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