कुरान - 16:97 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

97
مَنۡ عَمِلَ صَٰلِحٗا مِّن ذَكَرٍ أَوۡ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤۡمِنٞ فَلَنُحۡيِيَنَّهُۥ حَيَوٰةٗ طَيِّبَةٗۖ وَلَنَجۡزِيَنَّهُمۡ أَجۡرَهُم بِأَحۡسَنِ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Man 'amila saaliham min zakarin aw unsaa wa huwa mu'minun falanuhyiyannahoo hayaatan taiiyibatanw wa lanajzi yannnahum ajrahum bi ahsani maa kaanoo ya'maloon)

जो कोई नेक काम करे मर्द हो या औरत और वह ईमान वाला हो, तो हम ज़रूर उसे पाकीज़ा ज़िन्दगी (हयात-ए-तय्यिबा) जिलाएँगे [222] और ज़रूर उनका सवाब उनके बेहतरीन आमाल के मुताबिक़ अता फ़रमाएँगे [223]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 97 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 97 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"जो कोई नेक काम करे मर्द हो या औरत और वह ईमान वाला हो, तो हम ज़रूर उसे पाकीज़ा ज़िन्दगी जिलाएँगे [222] और ज़रूर उनका सवाब... अता फ़रमाएँगे [223]।"

[222] हयात-ए-तय्यिबा (पाकीज़ा ज़िन्दगी) का मफ़हूम

हयात-ए-तय्यिबा से मुराद दिल का सुकून, क़नाअत और इबादत की लज़्ज़त है। मोमिन ग़रीबी में भी मुतमइन रहता है, जबकि काफ़िर दौलत के ढेर में भी लालच और बेचैनी में जलता रहता है। नेकी का सवाब दुनिया में भी सुकून की शक्ल में मिलता है।

[223] आमाल की क़ुबूलियत के लिए ईमान शर्त

नेक आमाल के क़ुबूल होने और सवाब पाने के लिए ईमान बुनियादी शर्त है; बे-ईमान के आमाल आख़िरत में धूल की तरह उड़ जाएँगे।

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