Transliteration: (Fa awhaaa ilaa 'abdihee maaa awhaa)
"फिर अल्लाह ने अपने (ख़ास) बंदे पर जो वह्य फ़रमाई, सो वह्य फ़रमाई [12] [13]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'फ़-औहा इला अब्दिही' में ज़मीर अल्लाह तआला की तरफ़ फिरती है:
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'मा औहा' (जो वह्य फ़रमाई) को पोशीदा रखकर इसकी अज़मत को ज़ाहिर फ़रमाया गया:
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