कुरान - 27:11 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
إِلَّا مَن ظَلَمَ ثُمَّ بَدَّلَ حُسۡنَۢا بَعۡدَ سُوٓءٖ فَإِنِّي غَفُورٞ رَّحِيمٞ

Transliteration: (Illaa man zalama summa baddala husnam ba'da sooo'in fa innee Ghafoorur Raheem)

मगर जिस किसी ने ज़ुल्म किया [21], फिर बुराई के बाद नेकी से बदल दिया [22], तो बेशक मैं बहुत बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला हूँ। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 11

"मगर जिस किसी ने ज़ुल्म किया [21], फिर बुराई के बाद नेकी से बदल दिया [22], तो बेशक मैं बहुत बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला हूँ।"

[21] ज़ुल्म व लग़्ज़िश का ख़ौफ़

अंबियाए किराम तो गुनाहों से मासूम होते हैं, ख़ौफ़ सिर्फ़ उन लोगों को होना चाहिए जिन्होंने गुनाह और नाफ़रमानी की हो।

[22] तौबा और नेक आमाल से मग़्फ़िरत

अगर कोई गुनाहगार अपने गुनाहों से सच्ची तौबा कर ले और बुरे आमाल के बदले नेक आमाल करने लगे, तो अल्लाह तआला बड़ा ग़फ़ूर व रहीम है, वह उसकी पिछली तमाम ख़ताओं को माफ़ फ़रमा देता है।

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