कुरान - 27:13 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
فَلَمَّا جَآءَتۡهُمۡ ءَايَٰتُنَا مُبۡصِرَةٗ قَالُواْ هَٰذَا سِحۡرٞ مُّبِينٞ

Transliteration: (Falammaa jaaa'at hum Aayaatunaa mubsiratan qaaloo haazaa sihrum mubeen)

फिर जब उनके पास हमारी आंखें खोल देने वाली निशानियाँ आईं [26], तो उन्होंने कहा, 'यह तो खुला जादू है [27]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 13

"फिर जब उनके पास हमारी रौशन निशानियाँ आईं [26], तो उन्होंने कहा, 'यह तो खुला जादू है [27]!'"

[26] 'मुबसिरा' (आंखें खोल देने वाले मोजिज़ात)

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के मोजिज़ात इतने साफ़, रौशन और वाज़ेह थे कि किसी अक़्लमन्द इंसान के लिए उनके हक़ होने में कोई शक बाक़ी न रह सकता था।

[27] मोजिज़े को जादू कह कर टालना

मगर फ़िरऔन और उसके दरबारियों ने अपनी झूठी अना और हुकूमत बचाने के लिए उन अज़ीमुश्शान मोजिज़ात को 'खुला जादू' क़रार देकर आवाम को गुमराह किया।

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