कुरान - 27:12 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
وَأَدۡخِلۡ يَدَكَ فِي جَيۡبِكَ تَخۡرُجۡ بَيۡضَآءَ مِنۡ غَيۡرِ سُوٓءٖۖ فِي تِسۡعِ ءَايَٰتٍ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَقَوۡمِهِۦٓۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَوۡمٗا فَٰسِقِينَ

Transliteration: (Wa adkhil yadaka fee jaibika takhruj baidaaa'a min ghairisooo'in feetis'i Aayaatin ilaa Fir'awna wa qawmih; innahum kaanoo qawman faasiqeen)

और अपना हाथ अपने गिरेबान में डालो, वह किसी ऐब (बीमारी) के बग़ैर बिल्कुल चमकता हुआ निकलेगा [23]; (यह) फ़िरऔन और उसकी क़ौम की तरफ़ नौ निशानियों में से है [24] [25]; बेशक वे नाफ़रमान लोग हैं।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 12

"और अपना हाथ गिरेबान में डालो, वह बग़ैर किसी ऐब के चमकता निकलेगा [23]; फ़िरऔन और उसकी क़ौम की तरफ़ नौ निशानियों में से [24] [25]; बेशक वे नाफ़रमान लोग हैं।'"

[23] 'यदे बैज़ा' (सूरज जैसा चमकता हुआ हाथ)

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने अपना दस्त-ए-मुबारक अपने गिरेबान में डाल कर निकाला, तो वह सूरज और चांद की तरह जगमगाने लगा। यह चमक किसी बीमारी (जैसे कोढ़ या बरफ़) की सफ़ेदी नहीं थी बल्कि नूर-ए-इलाही का मोजिज़ाना ज़हूर था।

[24] नौ रौशन मोजिज़ात (तिसआ आयात)

अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा को फ़िरऔन के मुक़ाबले के लिए नौ अज़ीम मोजिज़ात अता फ़रमाए: असा, यदे-बैज़ा, कहत-साली, फलों की कमी, तूफ़ान, टिड्डी दल, कीड़े-मकोड़े (जूंएं), मेंढक और ख़ून।

[25] फ़िरऔन और उसकी क़ौम की सरकशी

ये मोजिज़ात फ़िरऔन और उसकी क़िबती क़ौम को हिदायत देने और उनकी सरकशी तोड़ने के लिए अता किए गए थे जो अल्लाह की नाफ़रमानी में हद से बढ़ चुके थे।

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