Transliteration: (Wa jahadoo bihaa wastaiqanat haaa anfusuhum zulmanw-wa 'uluwwaa; fanzur kaifa kaana 'aaqibatul mufsideen (section 1))
"और उन्होंने ज़ुल्म और तकब्बुर से उनका इंकार किया [28], हालाँकि दिलों को यक़ीन हो चुका था; पस देख लो फ़सादियों का कैसा अंजाम हुआ [29]!"
फ़िरऔन और उसकी क़ौम के दिल अंदर से पूरी तरह मुतमइन थे कि मूसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के सच्चे पैग़म्बर हैं और यह अल्लाह ही का मोजिज़ा है। मगर ज़ुल्म, घमंड और बादशाही के छिन जाने के डर से उन्होंने ज़बान से इंकार किया। इसे 'कुफ़्र-ए-इनादी' कहते हैं।
अल्लाह तआला ने उन ज़ालिमों और फ़सादियों को बहर-ए-क़ुलज़ुम में ग़र्क़ करके नेस्त व नाबूद कर दिया जो तमाम दुनिया के लिए क़ियामत तक इबरत का निशान है।
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