कुरान - 27:15 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا دَاوُۥدَ وَسُلَيۡمَٰنَ عِلۡمٗاۖ وَقَالَا ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي فَضَّلَنَا عَلَىٰ كَثِيرٖ مِّنۡ عِبَادِهِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Wa laqad aatainaa Daawooda wa sulaimaana 'ilmaa; wa qaalal hamdu lil laahil lazee faddalanaa 'alaa kaseerim min 'ibaadihil mu'mineen)

और बेशक हमने दाऊद और सुलैमान को बड़ा इल्म अता फ़रमाया [30], और दोनों ने कहा, 'तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमें अपने बहुत से मोमिन बंदों पर फ़ज़ीलत बख़्शी [31]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 15

"और बेशक हमने दाऊद और सुलैमान को बड़ा इल्म अता फ़रमाया [30], और दोनों ने कहा, 'अल्लाह का शुक्र जिसने हमें अपने बहुत से मोमिन बंदों पर फ़ज़ीलत दी [31]।'"

[30] हज़रत दाऊद व हज़रत सुलैमान का बेमिसाल इल्म

अल्लाह तआला ने हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम को ज़बूर शरीफ़, हिकमत, फ़ैसले की क़ुव्वत, लोहे को मोम करने और परिंदों व पहाड़ों के साथ हम्द करने का इल्म अता फ़रमाया; और हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम को तमाम जानवरों व परिंदों की बोलियां समझने, हवाओं पर हुकूमत और जिन्नात को ताबे करने का अज़ीम इल्म बख़्शा।

[31] इल्म पर शुक्रगुज़ारी और तवाज़ो

इतनी अज़ीम सल्तनत और इल्म पाने के बावजूद दोनों अंबिया ने आजिज़ाना शुक्र अदा किया कि सब तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमें अपने बहुत से मोमिन बन्दों पर फ़ज़ीलत अता फ़रमाई। इल्म का तकाज़ा गुरूर नहीं बल्कि आजिज़ी और शुक्रगुज़ारी है।

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