कुरान - 27:16 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
وَوَرِثَ سُلَيۡمَٰنُ دَاوُۥدَۖ وَقَالَ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ عُلِّمۡنَا مَنطِقَ ٱلطَّيۡرِ وَأُوتِينَا مِن كُلِّ شَيۡءٍۖ إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلۡفَضۡلُ ٱلۡمُبِينُ

Transliteration: (Wa warisa Sulaimaanu Daawooda wa qaala yaaa aiyuhan naasu 'ullimnaa mantiqat tairi wa ooteenaa min kulli shai'in inna haazaa lahuwal fadlul mubeen)

और सुलैमान, दाऊद के वारिस हुए [32] और उन्होंने कहा, 'ऐ लोगो! हमें परिंदों की बोली सिखाई गई है [33], और हमें हर चीज़ में से अता किया गया है [34]; बेशक यह बिल्कुल खुला फ़ज़्ल है [35]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 16

"और सुलैमान, दाऊद के वारिस हुए [32] और कहा, 'ऐ लोगो! हमें परिंदों की बोली सिखाई गई [33], और हर चीज़ अता की गई [34]; बेशक यह खुला फ़ज़्ल है [35]।'"

[32] नबूवत, इल्म और सल्तनत की विरासत

हज़रत सुलैमान अपने वालिद हज़रत दाऊद के माल के वारिस नहीं बने (क्योंकि हदीस-ए-पाक के मुताबिक़ अंबिया का कोई माली वारिस नहीं होता, उनका माल सदक़ा होता है), बल्कि आप हज़रत दाऊद की नबूवत, इल्म, हिकमत और सल्तनत के वारिस बने।

[33] 'मंतिक़त-तैर' (परिंदों की ज़बान का इल्म)

अल्लाह तआला ने हज़रत सुलैमान को परिंदों, जानवरों और कीड़े-मकोड़ों की बोलियां समझने और उनसे गुफ़्तगू करने का ख़ास मोजिज़ा अता फ़रमाया था।

[34] हर नेमत की फ़रावानी

अल्लाह ने आपको दीन और दुनिया की तमाम नेमतें—हिकमत, हुकूमत, लश्कर, जिन्नात की ताबेदारी और दौलत भरपूर अता फ़रमाई।

[35] 'फ़ज़्लुम मुबीन' (ज़ाहिर व वाज़ेह एहसान)

हज़रत सुलैमान ने तह्दीस-ए-नेमत के तौर पर ऐलान फ़रमाया कि यह सब महज़ अल्लाह तआला का खुला फ़ज़्ल व करम है।

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