कुरान - 27:18 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
حَتَّىٰٓ إِذَآ أَتَوۡاْ عَلَىٰ وَادِ ٱلنَّمۡلِ قَالَتۡ نَمۡلَةٞ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّمۡلُ ٱدۡخُلُواْ مَسَٰكِنَكُمۡ لَا يَحۡطِمَنَّكُمۡ سُلَيۡمَٰنُ وَجُنُودُهُۥ وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ

Transliteration: (hattaaa izaaa ataw 'alaa waadin namli qaalat namlatuny yaaa aiyuhan namlud khuloo masaakinakum laa yahtimannakum Sulaimaanu wa junooduhoo wa hum laa yash'uroon)

यहाँ तक कि जब वे चींटियों की वादी में पहुंचे [37], तो एक चींटी ने कहा, 'ऐ चींटियो! अपने बिलों (घरों) में दाख़िल हो जाओ, कहीं ऐसा न हो कि सुलैमान और उनका लश्कर तुम्हें रौंद डालें और उन्हें ख़बर भी न हो [38]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 18

"यहाँ तक कि जब वे चींटियों की वादी में पहुंचे [37], तो एक चींटी ने कहा, 'ऐ चींटियो! अपने घरों में दाख़िल हो जाओ, कहीं सुलैमान और उनका लश्कर तुम्हें रौंद न डालें बे-ख़बरी में [38]।'"

[37] 'वादी-उन-नम्ल' (चींटियों की सरज़मीन)

यह शाम के इलाके में वादी-ए-अस्क़लान या ताईफ़ के क़रीब एक वादी थी जहां कसरत से चींटियां आबाद थीं। इस चींटी का नाम मुफ़स्सिरीन ने 'जर्मा' या 'मुनज़िरा' लिखा है जो लंगड़ी थी मगर अपनी क़ौम की सरदार थी।

[38] चींटी का अदब और हुस्न-ए-ज़न्न

चींटी ने अपनी क़ौम को होशियार किया कि सुलैमान के लश्कर के क़दमों तले कुचलने से बचने के लिए बिलों में छुप जाओ। साथ ही चींटी ने यह कहकर नबी की शान का अदब किया कि 'और उन्हें ख़बर भी न हो'—यानी सुलैमान अलैहिस्सलाम और उनके मोमिन सिपाही कभी जान-बूझकर किसी बेगुनाह को नुक़सान नहीं पहुंचाते, अगर कोई नुक़सान होगा तो बे-ख़बरी में होगा।

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