Transliteration: (Fatabassama daahikam min qawlihaa wa qaala Rabbi awzi'nee an ashkura ni'mata kal lateee an'amta 'alaiya wa 'alaa waalidaiya wa an a'mala saalihan tardaahu wa adkhilnee birahmatika fee 'ibaadikas saaliheen)
"तो वे उसकी बात से मुस्कुरा कर हँस पड़े [40] और अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! मुझे शुक्र की तौफ़ीक़ दे उस नेमत पर जो तूने मुझ पर और मेरे वालिदैन पर की [41], और ऐसा अमल करूँ जिससे तू राज़ी हो [42], और मुझे अपने नेक बंदों में दाख़िल फ़रमा [43]।'"
हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम ने तीन मील की दूरी से हवा के ज़रिये उस नन्हीं चींटी की आवाज़ सुनी और उसकी समझदारी व अदब पर ख़ुशी से मुस्कुरा दिए। यह अल्लाह की दी हुई अज़ीम समाअत का मोजिज़ा था।
आपने बारगाह-ए-इलाही में अर्ज़ किया कि ऐ परवरदिगार! मुझे उन तमाम नेमतों का शुक्र अदा करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमा जो तूने मुझ पर और मेरे वालिदैन (हज़रत दाऊद वगैरह) पर फ़रमाईं।
दुआ की कि मौला! मुझे ऐसे आमाल-ए-सालेहा करने की तौफ़ीक़ दे जो तेरी बारगाह में मक़बूल हों और जिनसे तेरी रज़ा हासिल हो।
हज़रत सुलैमान ने निहायत आजिज़ाना दुआ फ़रमाई कि मुझे अपनी ख़ास रहमत से अपने मुक़र्रब नेक बन्दों और अंबिया की जमाअत में शामिल रख कर जन्नतुल फ़िरदौस का शरफ़ अता फ़रमा।
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