कुरान - 27:20 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
وَتَفَقَّدَ ٱلطَّيۡرَ فَقَالَ مَا لِيَ لَآ أَرَى ٱلۡهُدۡهُدَ أَمۡ كَانَ مِنَ ٱلۡغَآئِبِينَ

Transliteration: (Wa tafaqqadat taira faqaala maa liya laaa araa al hudhuda, am kaana minal ghaaa'ibeen)

और उन्होंने परिंदों का मुआइना किया, तो फ़रमाया, 'क्या बात है कि मैं हुदहुद को नहीं देख रहा, या वह ग़ैर-हाज़िरों में से है [44]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 20

"और उन्होंने परिंदों का मुआइना किया, तो फ़रमाया, 'क्या बात है कि मैं हुदहुद को नहीं देख रहा, या वह ग़ैर-हाज़िरों में से है [44]?"

[44] हुदहुद की ख़ास ख़िदमत और मुआइना

हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम जब पानी की तलाश फ़रमाते थे तो हुदहुद ज़मीन के नीचे छुपे हुए पानी की गहराई और जगह अपनी तेज़ नज़र से देख कर बता देता था, फिर जिन्नात उस जगह को खोद कर पानी निकालते थे। जब आपने परिंदों की सफ़ों का मुआइना फ़रमाया तो हुदहुद को अपनी जगह पर न पाकर उसकी ग़ैर-हाज़िरी पर जवाब-तलब फ़रमाया।

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