कुरान - 27:21 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
لَأُعَذِّبَنَّهُۥ عَذَابٗا شَدِيدًا أَوۡ لَأَاْذۡبَحَنَّهُۥٓ أَوۡ لَيَأۡتِيَنِّي بِسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٖ

Transliteration: (La-u'azzibanahoo 'azaaban shadeedan aw la azbahannahoo aw layaatiyannee bisultaanim mubeen)

मैं ज़रूर उसे सख़्त सज़ा दूँगा [45], या उसे ज़ब्ह कर डालूँगा, या फिर वह मेरे पास कोई खुली सनद (ठोस वजह) लेकर हाज़िर हो [46]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 21

"मैं ज़रूर उसे सख़्त सज़ा दूँगा [45], या ज़ब्ह कर डालूँगा, या वह मेरे पास कोई खुली सनद लेकर हाज़िर हो [46]।'"

[45] नज़्म व ज़ब्त और सज़ा की तंबीह

हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया कि अगर हुदहुद बिना इजाज़त ग़ैर-हाज़िर हुआ है तो मैं उसके पर उखड़वा कर धूप में डलवा दूँगा या उसे ज़ब्ह कर दूँगा ताकि लश्कर का नज़्म व ज़ब्त क़ायम रहे।

[46] 'सुलतानिन मुबीन' (माक़ूल उज़्र की गुंजाइश)

अदलो-इंसाफ़ का तक़ाज़ा यह था कि सज़ा देने से पहले मुल्ज़िम को अपनी सफ़ाई पेश करने का मौक़ा दिया जाए। आपने फ़रमाया कि अगर वह अपनी ग़ैर-हाज़िरी की कोई माक़ूल और ठोस वजह पेश कर दे तो उसे माफ़ कर दिया जाएगा।

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