Transliteration: (La-u'azzibanahoo 'azaaban shadeedan aw la azbahannahoo aw layaatiyannee bisultaanim mubeen)
"मैं ज़रूर उसे सख़्त सज़ा दूँगा [45], या ज़ब्ह कर डालूँगा, या वह मेरे पास कोई खुली सनद लेकर हाज़िर हो [46]।'"
हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया कि अगर हुदहुद बिना इजाज़त ग़ैर-हाज़िर हुआ है तो मैं उसके पर उखड़वा कर धूप में डलवा दूँगा या उसे ज़ब्ह कर दूँगा ताकि लश्कर का नज़्म व ज़ब्त क़ायम रहे।
अदलो-इंसाफ़ का तक़ाज़ा यह था कि सज़ा देने से पहले मुल्ज़िम को अपनी सफ़ाई पेश करने का मौक़ा दिया जाए। आपने फ़रमाया कि अगर वह अपनी ग़ैर-हाज़िरी की कोई माक़ूल और ठोस वजह पेश कर दे तो उसे माफ़ कर दिया जाएगा।
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