Transliteration: (Qaala sananzuru asadaqta am kunta minal kaazibeen)
"अल्लाह! उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह अज़ीम अर्श का रब है [56]।' [सजदा]"
हुदहुद ने अपनी बात का ख़ात्मा तौहीद के अज़ीमुश्शान कलमे पर किया कि सिर्फ़ अल्लाह ही इबादत के लायक़ है और वही कायनात के सबसे बड़े मख़लूक़ यानी 'अर्श-ए-अज़ीम' का मालिक व परवरदिगार है।
नोट: इस आयत-ए-मुबारका की तिलावत या समाअत पर सजदा-ए-तिलावत वाजिब होता है।
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