कुरान - 27:24 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
وَجَدتُّهَا وَقَوۡمَهَا يَسۡجُدُونَ لِلشَّمۡسِ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ أَعۡمَٰلَهُمۡ فَصَدَّهُمۡ عَنِ ٱلسَّبِيلِ فَهُمۡ لَا يَهۡتَدُونَ

Transliteration: (Allaa yasjudoo lillaahil lazee yukhrijul khab'a fis samaawaati wal ardi wa ya'lamu maa tukhfoona wa maa tu'linoon)

मैंने उसे और उसकी क़ौम को पाया कि वे अल्लाह को छोड़कर सूरज को सजदा करते हैं, और शैतान ने उनके आमाल उनके लिए ख़ुशनुमा बना दिए हैं [52] और उन्हें (सीधी) राह से रोक दिया है [53], पस वे हिदायत नहीं पाते [54]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 24

"मैंने उसे और उसकी क़ौम को पाया कि वे सूरज को सजदा करते हैं, और शैतान ने उनके आमाल ख़ुशनुमा बना दिए [52] और राह से रोक दिया [53], पस वे हिदायत नहीं पाते [54];"

[52] शम्श-परस्ती (सूरज की पूजा)

हुदहुद ने अर्ज़ किया कि इतनी दौलत और शान के बावजूद वे मुशरिक हैं और सुबह व शाम सूरज को सजदा करते हैं। शैतान ने उनके इस शिर्क को उनकी नज़रों में अच्छा बना दिया है।

[53] तौहीद की सीधी राह से रुकावट

शैतान ने उन्हें तौहीद और अल्लाह की बन्दगी की सीधी राह पर चलने से रोक रखा है।

[54] हिदायत से महरूमी

अक़्ल और सल्तनत होने के बावजूद वे हक़ीक़त को पहचानने और हिदायत हासिल करने से महरूम हैं।

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