कुरान - 27:25 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
أَلَّاۤ يَسۡجُدُواْۤ لِلَّهِ ٱلَّذِي يُخۡرِجُ ٱلۡخَبۡءَ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَيَعۡلَمُ مَا تُخۡفُونَ وَمَا تُعۡلِنُونَ

Transliteration: (Allaahu laaa ilaaha illaa Huwa Rabbul 'Arshil Azeem (make sajda))

ताकि वे उस अल्लाह को सजदा न करें जो आसमानों और ज़मीन की छुपी हुई चीज़ों को बाहर निकालता है [55], और जानता है जो कुछ तुम छुपाते हो और जो कुछ तुम ज़ाहिर करते हो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 25

"ताकि वे उस अल्लाह को सजदा न करें जो आसमानों और ज़मीन की छुपी चीज़ों को निकालता है [55], और जानता है जो तुम छुपाते और ज़ाहिर करते हो।"

[55] गै़ब का जानने वाला और नेमतों का ख़ालिक़

हुदहुद ने कहा कि अफ़सोस! वे उस अल्लाह को क्यों सजदा नहीं करते जो आसमान से बारिश और ज़मीन से सब्ज़ा व ख़ज़ाने निकालता है और दिलों के छुपे हुए भेदों से पूरी तरह बाख़बर है।

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