Transliteration: (Izhab bikitaabee haaza fa alqih ilaihim summma tawalla 'anhum fanzur maazaa yarji'oon)
"(सुलैमान ने) फ़रमाया, 'अब हम देखेंगे कि तूने सच कहा है या तू झूठों में से है [57];"
हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम ने एक आदिल और हकीम नबी की तरह फ़ौरन हुदहुद की बात पर भरोसा करके कोई फ़ैसला नहीं सुनाया, बल्कि फ़रमाया कि हम पहले तेरी बात की पूरी तहक़ीक़ करेंगे कि तू अपनी जान बचाने के लिए कोई बहाना बना रहा है या वाक़ई सच कह रहा है।
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