कुरान - 27:27 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
۞قَالَ سَنَنظُرُ أَصَدَقۡتَ أَمۡ كُنتَ مِنَ ٱلۡكَٰذِبِينَ

Transliteration: (Izhab bikitaabee haaza fa alqih ilaihim summma tawalla 'anhum fanzur maazaa yarji'oon)

(सुलैमान ने) फ़रमाया, 'अब हम देखेंगे कि तूने सच कहा है या तू झूठों में से है [57]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 27

"(सुलैमान ने) फ़रमाया, 'अब हम देखेंगे कि तूने सच कहा है या तू झूठों में से है [57];"

[57] तहक़ीक़ और तस्दीक़-ए-हाल

हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम ने एक आदिल और हकीम नबी की तरह फ़ौरन हुदहुद की बात पर भरोसा करके कोई फ़ैसला नहीं सुनाया, बल्कि फ़रमाया कि हम पहले तेरी बात की पूरी तहक़ीक़ करेंगे कि तू अपनी जान बचाने के लिए कोई बहाना बना रहा है या वाक़ई सच कह रहा है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now