कुरान - 27:29 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
قَالَتۡ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلۡمَلَؤُاْ إِنِّيٓ أُلۡقِيَ إِلَيَّ كِتَٰبٞ كَرِيمٌ

Transliteration: (Qaalat yaaa aiyuhal mala'u innee ulqiya ilaiya kitaabun kareem)

उस (मल्लिका) ने कहा, 'ऐ सरदाराने क़ौम! बेशक मेरी तरफ़ एक बेहद इज़्ज़त वाला (बा-वक़ार) ख़त डाला गया है [60]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 29

"उसने कहा, 'ऐ सरदाराने क़ौम! बेशक मेरी तरफ़ एक बा-वक़ार ख़त डाला गया है [60];"

[60] 'किताबुन करीम' (बा-इज़्ज़त और मुक़द्दस ख़त)

हुदहुद ने बिलक़ीस के ख़्वाबगाह के झरोखे से वह ख़त उसके सीने पर गिरा दिया। मल्लिका ने ख़त की मुहर और अंदाज़ देखकर फ़ौरन अपने तमाम वज़ीरों और सरदारों की मजलिस बुलाई और कहा कि यह कोई मामूली ख़त नहीं बल्कि इंतहाई इज़्ज़तदार और अज़ीम बादशाह का ख़त है।

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