कुरान - 27:28 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
ٱذۡهَب بِّكِتَٰبِي هَٰذَا فَأَلۡقِهۡ إِلَيۡهِمۡ ثُمَّ تَوَلَّ عَنۡهُمۡ فَٱنظُرۡ مَاذَا يَرۡجِعُونَ

Transliteration: (Izhab bikitaabee haaza fa alqih ilaihim summma tawalla 'anhum fanzur maazaa yarji'oon)

मेरा यह ख़त ले जा और इसे उनकी तरफ़ डाल दे [58], फिर उनसे अलग हटकर देख कि वे क्या जवाब देते हैं [59]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 28

"मेरा यह ख़त ले जा और इसे उनकी तरफ़ डाल दे [58], फिर अलग हटकर देख कि वे क्या जवाब देते हैं [59]।'"

[58] मुहर-बंद मुक़द्दस नामा-ए-मुबारक

हज़रत सुलैमान ने एक मुख़्तसर मगर निहायत बा-वक़ार ख़त तहरीर फ़रमाया, उस पर अपनी मुहर लगाई और हुदहुद को हुक्म दिया कि उड़ कर जाओ और इसे मल्लिका बिलक़ीस के महल में उसके सामने गिरा दो।

[59] मल्लिका और दरबारियों के रद्द-ए-अमल का मुशाहिदा

हुक्म दिया कि ख़त डालकर एक तरफ़ छुप जाना और ग़ौर से देखना व सुनना कि ख़त पढ़कर मल्लिका और उसके वज़ीर क्या गुफ़्तगू करते हैं और क्या फ़ैसला लेते हैं।

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