कुरान - 27:30 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
إِنَّهُۥ مِن سُلَيۡمَٰنَ وَإِنَّهُۥ بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

Transliteration: (Innahoo min Sulaimaana wa innahoo bismil laahir Rahmaanir Raheem)

बेशक वह सुलैमान की तरफ़ से है, और बेशक वह अल्लाह के नाम से (शुरू) है जो निहायत मेहरबान, बेहद रहम फ़रमाने वाला है [61]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 30

"बेशक वह सुलैमान की तरफ़ से है, और बेशक वह बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम से शुरू है [61];"

[61] ख़त का उनवान: बिस्मिल्लाह से आग़ाज़

मल्लिका ने ख़त खोलकर पढ़ा जिसमें लिखा था: 'यह ख़त सुलैमान की तरफ़ से है और अल्लाह के नाम से शुरू है जो निहायत मेहरबान, बेहद रहम फ़रमाने वाला है।' इससे साबित हुआ कि हर अहम तहरीर और ख़त का आग़ाज़ 'बिस्मिल्लाह' से करना सुन्नत-ए-अंबिया है। हज़रत सुलैमान का यह पैग़ाम तकब्बुर से पाक और सरासर रहमत व तौहीद की दावत पर मुश्तमिल था।

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