Transliteration: (Qaalat yaaa aiyuhal mala'u aftoonee fee amree maa kuntu qaati'atan amran hattaa tashhhadoon)
"उसने कहा, 'ऐ सरदाराने क़ौम! मेरे इस मामले में मुझे मशविरा दो [63]; मैं किसी मामले का फ़ैसला नहीं करती जब तक तुम मौजूद न हो।'"
मल्लिका बिलक़ीस निहायत अक़्लमन्द और दूर-अंदेश थी। उसने ख़त पढ़कर अपने दरबार के तीन सौ बारह (312) बड़े सरदारों और वज़ीरों को जमा किया और फ़रमाया कि यह बड़ा नाज़ुक मामला है, तुम लोग अपनी राय दो क्योंकि मेरी आदत है कि मैं किसी अहम मामले में तुम्हारी मौजूदगी और मशविरे के बग़ैर कोई आख़िरी फ़ैसला नहीं करती।
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