कुरान - 27:33 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
قَالُواْ نَحۡنُ أُوْلُواْ قُوَّةٖ وَأُوْلُواْ بَأۡسٖ شَدِيدٖ وَٱلۡأَمۡرُ إِلَيۡكِ فَٱنظُرِي مَاذَا تَأۡمُرِينَ

Transliteration: (Qaaloo nahnu uloo quwwatinw wa uloo baasin shadeed; wal amru ilaiki fanzuree maazaa taamureen)

उन्होंने कहा, 'हम बड़ी ताक़त वाले और सख़्त जंगजू हैं [64], और हुक्म आपका है [65], पस आप ग़ौर फ़रमा लें कि आप क्या हुक्म देती हैं।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 33

"उन्होंने कहा, 'हम बड़ी ताक़त वाले और सख़्त जंगजू हैं [64], और हुक्म आपका है [65], पस आप देख लें कि क्या हुक्म देती हैं।'"

[64] फ़ौजी ताक़त और जंगी सलाहियत का इज़हार

सरदारों ने अपनी वफ़ादारी और जंगी ताक़त का भरोसा दिलाते हुए कहा कि हमारे पास लाखों का हथियारबंद लश्कर है, हम जंग के मैदान में जान की बाज़ी लगाने वाले बहादुर लोग हैं, लिहाज़ा आपको किसी से ख़ौफ़ खाने की ज़रूरत नहीं।

[65] आख़िरी इख़्तियार मल्लिका के सुपुर्द

ताक़त का इज़हार करने के बावजूद उन्होंने अपनी अक़्लमंदी का सुबूत दिया कि हम अपनी तरफ़ से जंग का एलान नहीं करते, आख़िरी फ़ैसला और हुक्म आपका है। आप सुलह का हुक्म दें या जंग का, हम हर हाल में आपकी पैरवी करेंगे।

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