Transliteration: (Allaa ta'loo 'alaiya waa toonee muslimeen (section 2))
"यह कि मेरे मुक़ाबले में सरकशी न करो और फ़रमांबरदार होकर मेरे पास हाज़िर हो जाओ [62]!'"
ख़त का मज़मून निहायत जामेअ और बलीग़ था जिसमें दो बातें साफ़ फ़रमाई गईं: पहली यह कि तकब्बुर और सरकशी छोड़ो और मेरे मुक़ाबले में बगावत की जुर्रत न करो; दूसरी यह कि अल्लाह की तौहीद क़बूल करके सच्चे मुसलमान (फ़रमांबरदार) बनकर मेरी बारगाह में हाज़िर हो जाओ। इसमें कोई दुनियावी धमकी या फ़ख़्र न था बल्कि सरासर रज़ाए इलाही की तरफ़ दावत थी।
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