कुरान - 27:31 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
أَلَّا تَعۡلُواْ عَلَيَّ وَأۡتُونِي مُسۡلِمِينَ

Transliteration: (Allaa ta'loo 'alaiya waa toonee muslimeen (section 2))

यह कि मेरे मुक़ाबले में सरकशी न करो और फ़रमांबरदार (मुस्लिम) होकर मेरे पास हाज़िर हो जाओ [62]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 31

"यह कि मेरे मुक़ाबले में सरकशी न करो और फ़रमांबरदार होकर मेरे पास हाज़िर हो जाओ [62]!'"

[62] हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम का मुख़्तसर मगर पुर-जलाल पैग़ाम

ख़त का मज़मून निहायत जामेअ और बलीग़ था जिसमें दो बातें साफ़ फ़रमाई गईं: पहली यह कि तकब्बुर और सरकशी छोड़ो और मेरे मुक़ाबले में बगावत की जुर्रत न करो; दूसरी यह कि अल्लाह की तौहीद क़बूल करके सच्चे मुसलमान (फ़रमांबरदार) बनकर मेरी बारगाह में हाज़िर हो जाओ। इसमें कोई दुनियावी धमकी या फ़ख़्र न था बल्कि सरासर रज़ाए इलाही की तरफ़ दावत थी।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now