Transliteration: (Falammaa jaaa'a Sulaimaana qaala atumiddoonani bimaalin famaaa aataaniyal laahu khairum mimmmaaa aataakum bal antum bihadiy-yatikum tafrahoon)
"फिर जब क़ासिद सुलैमान के पास आया, तो फ़रमाया, 'क्या तुम माल से मेरी मदद करते हो? जो अल्लाह ने मुझे दिया वह उससे बेहतर है जो तुम्हें दिया [70]; बल्कि तुम ही अपने तोहफ़े पर इतराते हो [71]!"
हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम ने जिन्नात को हुक्म दिया कि महल के बाहर मीलों तक सोने-चांदी की ईंटों का फ़र्श बिछा दिया जाए और अजीबोग़रीब जानवरों को बांध दिया जाए। जब बिलक़ीस का एलची 'मुन्ज़िर बिन अम्र' पहुंचा तो अपने तोहफ़ों को उस दरबार के आगे निहायत हक़ीर देखकर दंग रह गया। हज़रत सुलैमान ने फ़रमाया कि अल्लाह ने मुझे नबूवत, इल्म और जो बेमिसाल सल्तनत अता की है, उसके सामने तुम्हारी यह फानी दौलत कोई हैसियत नहीं रखती।
फ़रमाया कि तुम दुनियादार लोग ही इन सोने-चांदी की फ़ानी चीज़ों पर ख़ुश होते और इतराते हो, अल्लाह के नबियों की नज़र में इन चीज़ों की कोई क़द्र व क़ीमत नहीं।
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